Personal Loan लेने से पहले इन 5 ज़रूरी बातों को चेक करना न भूलें।Complete Guide Hindi मैं

Personal Loan लेने से पहले इन 5 चीज़ों को ज़रूर चेक करें। Complete Guide Hindi मैं

आज के दौर में Personal Loan लेना उतना ही आसान हो गया है, जितना ऑनलाइन शॉपिंग करना। बस कुछ क्लिक्स, थोड़े डॉक्युमेंट्स, और पैसा सीधे आपके अकाउंट में आ जाता है! लेकिन क्या आपने कभी सोचा है, कि ये आसानी कभी-कभी बड़ी मुसीबत का कारण भी बन सकती है?

मान लीजिए राहुल को अपनी शादी के लिए ₹5 लाख की ज़रूरत थी। उसने बिना ज़्यादा सोचे-समझे पहले ही बैंक से लोन ले लिया जो उसे मिल भी गया। इंटरेस्ट रेट था 18% सालाना, और उसे पता भी नहीं चला कि दूसरे बैंकों में वही लोन 12-14% इंटरेस्ट रेट पर आसानी से मिल सकता था। नतीजा क्या हुआ? 3 साल में उसे ₹70,000 ज़्यादा ब्याज भरना पड़ा!

इसीलिए पर्सनल लोन लेने से पहले एक अच्छी चेकलिस्ट होना बेहद ज़रूरी है। इस आर्टिकल में हम आपको वो 5 महत्वपूर्ण पॉइंट्स बताएंगे जो लोन लेने से पहले आपको ज़रूर चेक करने चाहिए।

पर्सनल लोन लेते वक़्त लोग ये गलतियाँ कर बैठते हैं!

भारत में पर्सनल लोन की मांग तेज़ी से बढ़ रही है। RBI के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2024 में पर्सनल लोन का साइज़ लगभग ₹40 लाख करोड़ तक पहुँच गया है। लेकिन इस आसानी के साथ-साथ कुछ बड़ी समस्याएं भी सामने आती हैं, जैसे की – 

  • लोग सिर्फ़ लोन अमाउंट देखते हैं, इंटरेस्ट रेट और हिडन चार्जेस की तरफ ध्यान नहीं देते।
  • CIBIL Score चेक किए बिना अप्लाई कर देते हैं, और रिजेक्शन के बाद स्कोर और भी खराब हो जाता है।
  • प्रोसेसिंग फीस, प्रीपेमेंट चार्जेस जैसी बारीकियों को इग्नोर कर देते हैं।
  • EMI अपनी इनकम के हिसाब से फिट होगी या नहीं, ये कैलकुलेट नहीं करते।
  • लोन एग्रीमेंट की शर्तें ठीक से पढ़े बिना साइन कर देते हैं।

ये छोटी-छोटी गलतियाँ आपको फाइनेंशियल तौर पर काफ़ी नुकसान पहुँचा सकती हैं।

सही तरीके से पर्सनल लोन लेना क्यों ज़रूरी है?

पर्सनल लोन एक अनसिक्योर्ड लोन है, यानी इसमें आपको कोई कोलैटरल (गिरवी) नहीं रखना पड़ता। इसीलिए बैंक और NBFCs इस पर ज़्यादा इंटरेस्ट रेट चार्ज करते हैं।

अगर आप लोन लेते वक़्त सही चीज़ें चेक नहीं करते, तो

  • आप ज़रूरत से ज़्यादा इंटरेस्ट भर सकते हैं।
  • EMI का बोझ आपके मंथली बजट को बिगाड़ सकता है।
  • CIBIL Score खराब होने का खतरा बना रहता है।
  • हिडन चार्जेस की वजह से टोटल कॉस्ट बहुत बढ़ जाती है।

इसीलिए पर्सनल लोन चेकलिस्ट फॉलो करना बेहद ज़रूरी है।

पर्सनल लोन लेने से पहले इन 5 चीज़ों को ज़रूर चेक करें।

1. अपना CIBIL Score और पर्सनल लोन एलिजिबिलिटी चेक करें।

पर्सनल लोन अप्रूव होने की सबसे पहली शर्त है, आपका CIBIL Score। ये एक 3-डिजिट का नंबर होता है (300 से 900 के बीच) जो आपकी फाइनेंशियल डिसिप्लिन को दर्शाता है।

क्यों है ज़रूरी?

अगर आपका CIBIL Score 750 या इससे ज़्यादा है, तो आपको लोन आसानी से और कम इंटरेस्ट रेट पर मिल सकता है। स्कोर कम होने पर लोन रिजेक्ट हो सकता है, या फिर बहुत हाई इंटरेस्ट रेट लग सकता है।

CIBIL Score कैसे चेक करें?

CIBIL, Experian, Equifax जैसी एजेंसीज़ से फ्री में अपना स्कोर चेक कर सकते हैं। CIBIL की ऑफिशियल वेबसाइट पर साल में एक बार फ्री रिपोर्ट मिल जाती है।

पर्सनल लोन एलिजिबिलिटी के मुख्य फैक्टर्स:

  • उम्र: आमतौर पर 21 से 60 साल के बीच
  • इनकम: सैलरीड लोगों के लिए मिनिमम ₹15,000-₹25,000 प्रति महीना
  • एम्प्लॉयमेंट: स्टेबल जॉब या बिज़नेस होना ज़रूरी
  • क्रेडिट हिस्ट्री: कम से कम 6-12 महीने का क्रेडिट ट्रैक रिकॉर्ड

💡 Rupeeyo टिप: लोन अप्लाई करने से 3-6 महीने पहले से अपना CIBIL Score इम्प्रूव करने की कोशिश करें। टाइम पर EMI भरें, क्रेडिट कार्ड बिल्स क्लियर करें और क्रेडिट यूटिलाइज़ेशन 30% से कम रखें।

2. इंटरेस्ट रेट और टोटल कॉस्ट की तुलना करें।

पर्सनल लोन में इंटरेस्ट रेट आपकी सबसे बड़ी कॉस्ट होती है। अलग-अलग बैंकों और NBFCs की रेट्स में 2-5% तक का फर्क हो सकता है।

करंट इंटरेस्ट रेट रेंज (2024-25):

लेंडर के प्रकार

इंटरेस्ट रेट रेंज

पब्लिक सेक्टर बैंक

10.50% – 16.00%

प्राइवेट बैंक

10.25% – 18.00%

NBFCs

11.00% – 24.00%

फिनटेक ऐप्स

11.99% – 30.00%

(ये रेट्स अंदाजीत हैं, और आपके क्रेडिट प्रोफाइल के आधार पर बदल सकती हैं)

उदाहरण से समझें: मान लीजिए आप ₹5 लाख का लोन 3 साल के लिए लेते हैं,

  • 12% इंटरेस्ट पर: टोटल इंटरेस्ट = ₹97,858, कुल चुकाना होगा = ₹5,97,858
  • 18% इंटरेस्ट पर: टोटल इंटरेस्ट = ₹1,50,743, कुल चुकाना होगा = ₹6,50,743

देखा? सिर्फ 6% का फर्क आपको ₹52,885 एक्स्ट्रा पे करवा देता है!

पर्सनल लोन लेने से पहले यह जरूर चेक करें।

  • कम से कम 3-4 लेंडर्स की रेट्स कम्पेयर करें।
  • प्रोसेसिंग फीस, GST और दूसरे चार्जेस ऐड करके APR (Annual Percentage Rate) निकालें।
  • ऑनलाइन लोन कम्पेरिजन वेबसाइट जैसे BankBazaar, PolicyBazaar यूज़ कर सकते हैं।

3. प्रोसेसिंग फीस और हिडन चार्जेस को समझें।

इंटरेस्ट रेट के अलावा कई हिडन चार्जेस होते हैं, जो आपकी टोटल कॉस्ट बढ़ा देते हैं।

पर्सनल लोन कॉमन चार्जेस जो लगते हैं।

  • प्रोसेसिंग फीस: लोन अमाउंट का 0.5% से 3% + GST
  • प्रीपेमेंट चार्जेस: कुछ बैंक लोन जल्दी क्लोज़ करने पर 2-5% चार्ज करते हैं।
  • लेट पेमेंट पेनल्टी: EMI मिस करने पर ₹500-₹1,000 या EMI अमाउंट का 2%
  • स्टाम्प ड्यूटी: स्टेट के हिसाब से ₹100-₹1,000
  • डॉक्युमेंटेशन चार्जेस: ₹500-₹2,000
  • चेक बाउंस चार्जेस: ₹400-₹750

⚠️ ध्यान रखें: कुछ बैंक “ज़ीरो प्रोसेसिंग फीस” ऑफर्स देते हैं, लेकिन उनका इंटरेस्ट रेट थोड़ा ज़्यादा होता है। टोटल कॉस्ट कैलकुलेट करके ही फैसला लें।

4. EMI को अपनी मंथली इनकम से मैच करें।

पर्सनल लोन लेते वक़्त सबसे बड़ी गलती यही होती है, EMI अफोर्डेबिलिटी चेक नहीं करना।

गोल्डन रूल याद रखें:

आपकी कुल EMIs (सभी लोन मिलाकर) आपकी मंथली इनकम का 40-50% से ज़्यादा नहीं होनी चाहिए।

उदाहरण से समझें:

अगर आपकी मंथली इनकम ₹50,000 है तो:

  • मैक्सिमम EMI बर्डन = ₹20,000-₹25,000
  • अगर पहले से होम लोन या कार लोन की EMI ₹15,000 है।
  • तो पर्सनल लोन की EMI मैक्सिमम ₹5,000-₹10,000 होनी चाहिए।

EMI कैलकुलेटर यूज़ करें:

  • EMI कैलकुलेटर में लोन अमाउंट, इंटरेस्ट रेट और टेन्योर डालें।
  • देखें कि EMI आराम से अफोर्ड कर सकते हैं या नहीं।
  • इमरजेंसी फंड और मंथली एक्सपेंसेज़ के लिए स्पेस रखें।

टेन्योर सिलेक्शन टिप्स:

  • शॉर्ट टेन्योर (1-2 साल): हाई EMI, लेकिन कम इंटरेस्ट कॉस्ट
  • लॉन्ग टेन्योर (3-5 साल): लो EMI, लेकिन ज़्यादा इंटरेस्ट कॉस्ट
  • अपनी फाइनेंशियल सिचुएशन के हिसाब से बैलेंस बनाएँ

5. लोन एग्रीमेंट और टर्म्स एंड कंडीशंस ध्यान से पढ़ें।

ये सबसे बोरिंग लेकिन सबसे ज़रूरी स्टेप है। ज़्यादातर लोग लोन एग्रीमेंट पर बिना पढ़े साइन कर देते हैं, और बाद में परेशानी होती है।

पर्सनल लोन मे इन चीज़ों को ज़रूर चेक करें:

  • इंटरेस्ट रेट टाइप: फिक्स्ड है या फ्लोटिंग? (फिक्स्ड रेट नहीं बदलता, फ्लोटिंग मार्केट के हिसाब से बदलता है)
  • प्रीपेमेंट/फोरक्लोज़र पॉलिसी: क्या आप लोन जल्दी क्लोज़ कर सकते हैं? चार्जेस कितने हैं?
  • EMI ड्यू डेट: कौनसी तारीख को EMI कटेगी? सैलरी के बाद की डेट सिलेक्ट करें।
  • लेट पेमेंट रूल्स: कितने दिन की ग्रेस पीरियड है? पेनल्टी क्या है?
  • इंश्योरेंस क्लॉज: कुछ बैंक लोन इंश्योरेंस कंपलसरी करते हैं (ये ऑप्शनल होना चाहिए)
  • कोलैटरल/गारंटर: पर्सनल लोन में नॉर्मली नहीं होता, लेकिन कुछ केसेज़ में माँगा जा सकता है।
  • मोरेटोरियम पीरियड: कुछ लेंडर्स पहले 1-2 महीने की EMI स्किप की फैसिलिटी देते हैं।

पर्सनल लोन मे इन रेड फ्लैग्स से बचें:

  • बहुत ज़्यादा अपफ्रंट फीस माँगना।
  • एग्रीमेंट में अनक्लियर टर्म्स या बहुत स्मॉल प्रिंट।
  • प्रीपेमेंट की फैसिलिटी न देना।
  • पर्सनल लोन के नाम पर क्रेडिट कार्ड या इंश्योरेंस बेचना।

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Personal Loan Checklist Summary

  • CIBIL Score चेक करें और कम से कम 750+ बनाए रखें।
  • इंटरेस्ट रेट्स कम्पेयर करें – 2-3% का फर्क भी लाखों की बचत करवा सकता है।
  • हिडन चार्जेस का हिसाब लगाएँ – प्रोसेसिंग फीस, प्रीपेमेंट चार्जेस, पेनल्टीज़।
  • EMI अफोर्डेबिलिटी टेस्ट करें – अपनी इनकम का 40-50% से ज़्यादा EMI बर्डन न लें।
  • लोन एग्रीमेंट ध्यान से पढ़ें – टर्म्स क्लियर समझें, जल्दबाज़ी न करें।

पर्सनल लोन एक पावरफुल फाइनेंशियल टूल है अगर सही तरीके से यूज़ किया जाए। लेकिन गलत प्लानिंग या जल्दबाज़ी में लिया गया लोन आपकी फाइनेंशियल हेल्थ को नुकसान पहुँचा सकता है।

FAQs: पर्सनल लोन से जुड़े सवाल

Q1: पर्सनल लोन के लिए मिनिमम CIBIL Score कितना होना चाहिए?

Ans: ज़्यादातर बैंकों के लिए मिनिमम 650-700 का CIBIL Score ज़रूरी होता है। लेकिन अगर आपका स्कोर 750 या इससे ऊपर है, तो आपको बेहतर इंटरेस्ट रेट्स और जल्दी अप्रूवल मिलता है। सीबील स्कोर कम होने पर भी लोन मिल सकता है, लेकिन इंटरेस्ट रेट हाई होगा।

Q2: पर्सनल लोन एलिजिबिलिटी चेक करने से CIBIL Score पर असर पड़ता है क्या?

Ans: अगर आप सिर्फ़ अपना स्कोर चेक कर रहे हैं, या बैंकों की प्री-अप्रूव्ड ऑफर्स देख रहे हैं (सॉफ्ट इन्क्वायरी), तो स्कोर पर कोई असर नहीं पड़ता। लेकिन जब आप फॉर्मली लोन अप्लाई करते हैं (हार्ड इन्क्वायरी), तो हर एप्लिकेशन से स्कोर पर थोड़ा इम्पैक्ट पड़ता है। इसीलिए एक साथ बहुत सारी जगह अप्लाई करने से बचें।

Q3: क्या पर्सनल लोन जल्दी क्लोज़ करने पर कोई चार्जेस लगते हैं?

Ans: कुछ बैंक प्रीपेमेंट या फोरक्लोज़र चार्जेस लेते हैं, जो लोन अमाउंट का 2-5% तक हो सकता है। RBI के नियमों के मुताबिक, फ्लोटिंग रेट वाले लोन पर प्रीपेमेंट चार्जेस नहीं लगने चाहिए। लोन लेने से पहले ये ज़रूर कन्फर्म करें कि प्रीपेमेंट पॉलिसी क्या है।

Q4: पर्सनल लोन लेते वक़्त कौनसे डॉक्युमेंट्स चाहिए होते हैं?

Ans: बेसिक डॉक्युमेंट्स:
1. आइडेंटिटी प्रूफ (आधार, PAN कार्ड, पासपोर्ट)
2. एड्रेस प्रूफ (आधार, यूटिलिटी बिल्स, रेंट एग्रीमेंट)
3. इनकम प्रूफ (सैलरी स्लिप्स – लास्ट 3 महीने, बैंक स्टेटमेंट्स – लास्ट 6 महीने)
4. एम्प्लॉयमेंट प्रूफ (ऑफर लेटर, ID कार्ड, Form 16)
5. पासपोर्ट साइज़ फोटो
सेल्फ-एम्प्लॉयड लोगों के लिए ITR, बिज़नेस प्रूफ और बैंक स्टेटमेंट्स भी ज़रूरी होते हैं।

Q5: पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड लोन में क्या फर्क है? कौनसा बेहतर है?

Ans: पर्सनल लोन:
– फिक्स्ड EMI और टेन्योर
– कम इंटरेस्ट रेट (10-18%)
– वन-टाइम डिस्बर्समेंट
– बड़े अमाउंट के लिए बेहतर
क्रेडिट कार्ड लोन/EMI:
– रिवॉल्विंग क्रेडिट फैसिलिटी
– हाई इंटरेस्ट (15-36%)
– फ्लेक्सिबल यूसेज
– छोटे अमाउंट और शॉर्ट-टर्म के लिए ठीक
बड़ी ज़रूरतों के लिए पर्सनल लोन ज़्यादा अफोर्डेबल होता है, क्योंकि इंटरेस्ट रेट कम होता है।

निष्कर्ष

पर्सनल लोन लेना गलत नहीं है, बस ज़िम्मेदारी से लेना चाहिए। हमने अपने कई रीडर्स से बात करके पाया कि जो लोग लोन लेने से पहले प्रॉपर रिसर्च करते हैं, वो न सिर्फ़ बेहतर डील्स पाते हैं, बल्कि फाइनेंशियल तौर पर भी ज़्यादा सिक्योर रहते हैं।

हमारी सलाह है कि पर्सनल लोन सिर्फ़ जेन्युइन ज़रूरतों के लिए लें, जैसे की शादी, मेडिकल इमरजेंसी, एजुकेशन, होम रेनोवेशन जैसी चीज़ों के लिए। लाइफस्टाइल एक्सपेंसेज़ या इम्पल्स परचेज़ के लिए लोन लेने से बचें।

और हाँ, लोन लेने से पहले इमरजेंसी फंड ज़रूर बनाएँ। कम से कम 3-6 महीने के एक्सपेंसेज़ का बफर होना चाहिए। इससे आप फाइनेंशियल तौर पर ज़्यादा कॉन्फिडेंट रहेंगे।

याद रखें: लोन लेना आसान है, लेकिन चुकाना मुश्किल हो सकता है। इसलिए पर्सनल लोन लेने से पहले चेक करने वाली चीज़ों की ये चेकलिस्ट फॉलो करें और स्मार्ट फाइनेंशियल डिसीजन लें।

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