लोन रिजेक्ट क्यों होता है? जानिए 6 बड़े कारण और बचाव के तरीके
क्या आपका लोन एप्लीकेशन रिजेक्ट हो गया है? अगर हाँ, तो आप अकेले नहीं हैं। हर साल लाखों भारतीयों के लोन एप्लीकेशन बैंकों और NBFCs द्वारा रिजेक्ट कर दिए जाते हैं। RBI की एक रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 30-35% पर्सनल लोन एप्लीकेशन पहली बार में ही रिजेक्ट हो जाते हैं।
लोन रिजेक्शन का मतलब यह बिल्कुल नहीं कि आपका फाइनेंशियल फ्यूचर खत्म हो गया। ज्यादातर केस में, कुछ सामान्य गलतियाँ होती हैं, जिन्हें समझकर और सुधारकर आप अगली बार सफलतापूर्वक लोन पा सकते हैं।
इस आर्टिकल में हम जानेंगे कि लोन रिजेक्शन रीज़न क्या होते हैं, कौन सी गलतियाँ आम हैं, और लोन रिजेक्शन से कैसे बचें। साथ ही हम आपको बताएंगे कि क्रेडिट स्कोर कैसे सुधारें और डॉक्यूमेंट्स को कैसे तैयार रखें। चलिए शुरू करते हैं।
लोन रिजेक्ट क्यों होता है? जानिए मुख्य कारण
1. कम क्रेडिट स्कोर (सबसे बड़ा कारण)
क्रेडिट स्कोर आपकी फाइनेंशियल डिसिप्लिन को दर्शाता है। भारत में CIBIL, Experian, Equifax, और CRIF High Mark जैसी एजेंसी क्रेडिट स्कोर कैलकुलेट करती हैं।
क्या होता है:
- 750+ स्कोर को एक्सीलेंट माना जाता है।
- 650-750 को एवरेज (लोन मिल सकता है, पर हायर इंटरेस्ट रेट पर)
- 650 से कम स्कोर पर ज्यादातर बैंक लोन रिजेक्ट कर देते हैं।
क्यों खराब होता है क्रेडिट स्कोर:
- EMI या क्रेडिट कार्ड बिल का लेट पेमेंट करने से
- क्रेडिट कार्ड की लिमिट का 50% से ज्यादा इस्तेमाल (हाई क्रेडिट यूटिलाइजेशन) करने पर
- बहुत सारे लोन या क्रेडिट कार्ड एक साथ लेना
- पुराने लोन का सेटलमेंट (न कि फुल पेमेंट)
2. इनकम और जॉब स्टेबिलिटी की कमी
बैंक और NBFCs चाहते हैं, कि आपकी इनकम स्टेबल हो और आप EMI आराम से चुका सकें।
कॉमन इशू:
- कम मंथली इनकम (पर्सनल लोन के लिए कम से कम ₹15,000-25,000/माह चाहिए होता है)
- फ्रीक्वेंट जॉब चेंज (6 महीने से कम जॉब टेन्योर)
- सेल्फ-एम्प्लॉयड होने पर इनकंसिस्टेंट इनकम प्रूफ
- इनकम के अनुपात में बहुत ज्यादा लोन माँगना
Data Points: बैंक आमतौर पर चाहते हैं, कि आपकी सभी EMIs आपकी मंथली इनकम का 40-50% से ज्यादा न हों।
3. इनकम्पलीट या इनकरेक्ट डॉक्यूमेंट्स
यह बहुत सामान्य गलती है जो लोग जल्दबाजी में करते हैं।
गलतियाँ जो होती हैं:
- पुराने एड्रेस प्रूफ या ID प्रूफ
- बैंक स्टेटमेंट में मिसमैच (एप्लीकेशन में ₹50,000 सैलरी बताई, स्टेटमेंट में ₹40,000 शो हो रही है।)
- सेल्फ-एम्प्लॉयड के लिए ITR और बैंक स्टेटमेंट न मैच होना।
- फॉर्म में गलत डिटेल्स या सिग्नेचर की गलती।
4. पहले से बहुत सारे लोन या हाई डेट
अगर आपके पास पहले से कई लोन हैं, तो नया लोन अप्रूवल मुश्किल हो जाता है।
समस्या:
- मल्टीपल क्रेडिट कार्ड ड्यू पेंडिंग हैं।
- पहले का पर्सनल लोन या होम लोन चल रहा है।
- किसी के लिए गारंटर बने हैं, और वो EMI नहीं दे रहा।
बैंक आपकी डेट-टू-इनकम रेशियो देखते हैं। अगर यह 50% से ज्यादा है, तो लोन रिजेक्शन की संभावना बढ़ जाती है।
5. बार-बार लोन अप्लाई करना (मल्टीपल एनक्वायरी)
हर बार जब आप लोन के लिए अप्लाई करते हैं, तो बैंक आपका क्रेडिट रिपोर्ट चेक करती है। इसे हार्ड एनक्वायरी कहते हैं।
समस्या क्या है:
- 3-6 महीने में बहुत सारी हार्ड एनक्वायरी से क्रेडिट स्कोर गिरता है।
- बैंक को लगता है, कि आप फाइनेंशियली डेस्पेरेट हैं।
- यह “क्रेडिट हंग्री” बिहेवियर माना जाता है।
6. Age और रिटायरमेंट के करीब होना
अगर आप रिटायरमेंट एज के करीब हैं, तो लॉन्ग-टर्म लोन मिलना मुश्किल होता है।
उदाहरण:
- 55-60 साल की उम्र में 20 साल का होम लोन नहीं मिलेगा।
- बैंक चाहते हैं, कि लोन की मैच्योरिटी से पहले आपकी रेगुलर इनकम हो।
लोन रिजेक्शन से कैसे बचें? एक्सपर्ट टिप्स।
टिप 1: सबसे जरूरी अपना क्रेडिट स्कोर सुधारें।
क्या करें:
- सभी बिल और EMIs समय पर भरें (यहाँ तक कि ₹100 लेट पेमेंट भी क्रेडिट स्कोर गिरा सकता है।)
- क्रेडिट कार्ड का मंथली यूटिलाइजेशन 30% से कम रखें।
- पुराने क्रेडिट कार्ड बंद न करें (क्रेडिट हिस्ट्री लंबी रखें)
- अगर कोई गलत एंट्री है, तो CIBIL डिस्प्यूट के थ्रू करेक्ट कराएं।
टाइम लाइन: क्रेडिट स्कोर सुधरने में 3-6 महीने का समय लग सकता है।
टिप 2: डॉक्यूमेंट्स को सही और अपडेटेड रखें।
चेकलिस्ट:
- PAN कार्ड और आधार अपडेटेड हों।
- लेटेस्ट 3-6 महीने की सैलरी स्लिप या बैंक स्टेटमेंट।
- एड्रेस प्रूफ बिल्कुल करंट (बिजली बिल, रेंट एग्रीमेंट)
- सेल्फ-एम्प्लॉयड के लिए लास्ट 2 साल का ITR
- फॉर्म 16 (सैलरीड एम्प्लॉई के लिए)
प्रो टिप: सभी डॉक्यूमेंट्स की स्कैन्ड कॉपी एक फोल्डर में रेडी रखें।
टिप 3: रियलिस्टिक लोन अमाउंट माँगें।
फॉर्मूला: अगर आपकी मंथली इनकम ₹50,000 है, तो मैक्सिमम EMI ₹20,000-25,000 (40-50%) तक ही रखें।
पर्सनल लोन के लिए: बैंक आमतौर पर आपकी एनुअल इनकम का 10-15 गुना तक लोन दे सकते हैं (क्रेडिट स्कोर और प्रोफाइल के आधार पर)।
टिप 4: मौजूदा लोन को मैनेज करें।
स्टेप्स:
- छोटे-छोटे लोन को पहले बंध करें।
- क्रेडिट कार्ड के ड्यू क्लियर करें।
- अगर हो सके तो कुछ लोन को कंसोलिडेट करें।
- गारंटर बनने से बचें (जब तक बहुत जरूरी न हो)
टिप 5: सही समय पर अप्लाई करें।
कब अप्लाई न करें:
- अभी-अभी जॉब चेंज की हो (कम से कम 6 महीने वेट करें)
- पिछले 3 महीने में कई लोन के लिए अप्लाई कर चुके हों।
- क्रेडिट स्कोर 650 से कम हो।
सही समय:
- स्टेबल जॉब के 6-12 महीने बाद
- क्रेडिट स्कोर सुधारने के बाद
- फाइनेंशियल इमरजेंसी न हो, प्लाननिग की लोन हो
टिप 6: को-एप्लीकेंट जोड़ें।
अगर आपकी इनकम कम है, या क्रेडिट स्कोर एवरेज है, तो:
- स्पाउस को को-एप्लीकेंट बनाएं (कंबाइन्ड इनकम से अप्रूवल चांस बढ़ते हैं)
- पैरेंट्स या सिबलिंग भी को-एप्लीकेंट हो सकते हैं।
लोन रिजेक्शन रीज़न और सॉल्यूशन
कारण | इम्पैक्ट | समाधान | टाइम |
कम क्रेडिट स्कोर | बहुत ज्यादा | बिल ऑन टाइम, क्रेडिट यूटिलाइजेशन कम करें | 3-6 महीने |
इनकम्पलीट डॉक्यूमेंट्स | मध्यम | सभी पेपर रेडी और वेरिफाइड रखें | तुरंत |
हाई डेट-टू-इनकम | ज्यादा | एग्जिस्टिंग लोन क्लोज करें | 6-12 महीने |
मल्टीपल एनक्वायरी | मध्यम | 6 महीने तक नए एप्लीकेशन से बचें | 6 महीने |
जॉब इनस्टेबिलिटी | ज्यादा | करंट जॉब में 6+ महीने कम्पलीट करें | 6 महीने |
इन मुख्य बातों का ध्यान रखें।
- लोन रिजेक्शन आम बात है – हर साल लाखों एप्लीकेशन रिजेक्ट होते हैं।
- क्रेडिट स्कोर सबसे इम्पोर्टेंट फैक्टर है – 750+ स्कोर रखने की कोशिश करें।
- डॉक्यूमेंट्स कम्पलीट और सही होने चाहिए – कोई भी गलती रिजेक्शन का कारण बन सकती है।
- रियलिस्टिक लोन अमाउंट माँगें – अपनी इनकम के 40-50% से ज्यादा EMI न लें।
- मल्टीपल एप्लीकेशन से बचें – हर हार्ड एनक्वायरी आपके क्रेडिट स्कोर को नुकसान पहुँचाती है।
- धैर्य रखें – क्रेडिट स्कोर सुधारने और फिर से अप्लाई करने में 3-6 महीने लग सकते हैं।
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निष्कर्ष
लोन रिजेक्शन निराशाजनक हो सकता है, खासकर जब आपको पैसों की सख्त जरूरत हो। लेकिन इसे अपनी फाइनेंशियल हेल्थ को समझने और सुधारने का एक मौके के रूप में देखें।
हमारा मानना है कि सुनियोजित लोन हमेशा इमरजेंसी लोन से बेहतर है। अगर आपका लोन रिजेक्ट हुआ है, तो जल्दबाजी में दूसरी जगह अप्लाई न करें। पहले अपना क्रेडिट स्कोर चेक करें, डॉक्यूमेंट्स तैयार करें, और मौजूदा डेट को मैनेज करें।
याद रखें: लोन सुविधा नहीं, एक जिम्मेदारी है। सिर्फ इसलिए लोन न लें क्योंकि मिल रहा है। हमेशा रीपेमेंट कैपेसिटी देखकर ही कोई भी लोन लें।
Disclaimer: हम इन्वेस्टमेंट सलाह नहीं देते। यह आर्टिकल सिर्फ एजुकेशनल पर्पज के लिए है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सवाल 1: लोन रिजेक्ट होने के बाद कितने दिन बाद फिर से अप्लाई कर सकते हैं?
जवाब: कम से कम 3-6 महीने का गैप रखें। इस बीच अपना क्रेडिट स्कोर सुधारें और जो भी रिजेक्शन रीज़न था, उसे ठीक करें। तुरंत दूसरी जगह अप्लाई करने से आपके क्रेडिट स्कोर को और नुकसान हो सकता है।
सवाल 2: क्या लोन रिजेक्शन से क्रेडिट स्कोर पर असर पड़ता है?
जवाब: सीधे तौर पर नहीं, लेकिन अगर आप बार-बार अलग-अलग जगह अप्लाई करते हैं, तो हर हार्ड एनक्वायरी से स्कोर थोड़ा-थोड़ा गिरता है। एक रिजेक्शन के बाद 6 महीने तक वेट करना बेहतर है।
सवाल 3: अगर मेरा क्रेडिट स्कोर 600 है, तो क्या लोन मिल सकता है?
जवाब: मिल सकता है, लेकिन बहुत ज्यादा इंटरेस्ट रेट पर (18-24% तक)। कुछ NBFCs लो क्रेडिट स्कोर पर भी लोन देते हैं। लेकिन बेहतर यही है, कि पहले अपना स्कोर 700+ करें, फिर अप्लाई करें।
सवाल 4: क्या गारंटर रखने से लोन अप्रूवल की चांस बढ़ती हैं?
जवाब: हाँ, अगर गारंटर का क्रेडिट स्कोर अच्छा है, और स्टेबल इनकम है तो अप्रूवल चांस बढ़ जाती हैं। लेकिन गारंटर बनना सीरियस जिम्मेदारी है, अगर आप EMI नहीं दे पाए तो गारंटर के क्रेडिट स्कोर पर भी असर पड़ेगा।
सवाल 5: सेल्फ-एम्प्लॉयड हूँ और मेरा लोन रिजेक्ट हो गया, क्या करूँ?
जवाब: सेल्फ-एम्प्लॉयड के लिए लोन अप्रूवल में ये डॉक्यूमेंट्स जरूरी हैं:
1. पिछले 2-3 साल का ITR
2. GST रिटर्न (अगर रजिस्टर्ड हैं)
3. बैंक स्टेटमेंट जो कंसिस्टेंट इनकम शो करें
3. बिज़नेस प्रूफ (रजिस्ट्रेशन, लाइसेंस, आदि)
साथ ही, थोड़ा बड़ा डाउन पेमेंट या कोलैटरल देने की कोशिश करें।







