SIP से डरते हैं? पहली बार निवेश करने वालों के लिए 3 ज़रूरी स्टेप्स

SIP से डरते हैं? पहली बार निवेश करने वालों के लिए 3 ज़रूरी स्टेप्स

क्या आप भी उन लाखों भारतीयों में से हैं, जो SIP (Systematic Investment Plan) के बारे में सुनकर सोचते हैं, की “शुरू करूं या नहीं? अगर पैसा डूब गया तो?” यह डर बिल्कुल सामान्य है।

AMFI (Association of Mutual Funds in India) के मार्च 2025 के आंकड़ों के अनुसार, भारत में 8.09 करोड़ से ज़्यादा SIP अकाउंट्स एक्टिव हैं, लेकिन इसके बावजूद 70% से ज़्यादा लोग म्यूचुअल फंड में निवेश कर ने से डरते हैं, जिसका मुख्य कारण है, सही जानकारी की कमी और बाज़ार की अस्थिरता का डर।

अगर आप भी पहली SIP शुरू करने के डर से गुज़र रहे हैं, तो यह आर्टिकल ख़ास आपके लिए है। आज हम आपको बताएंगे 3 बेहद आसान और प्रैक्टिकल स्टेप्स, जिन्हें फॉलो करके आप अपना पहला SIP बिना घबराए शुरू कर सकते हैं। इस गाइड में हम समझेंगे, कि SIP क्या है, डर किन बातों का है, और कैसे स्मार्ट प्लानिंग से आप अपनी फाइनेंशियल सफर आत्मविश्वास के साथ शुरू कर सकते हैं।

Contents

SIP से क्यों डर लगता है? समझिए असली वजहें।

ज़्यादातर नए निवेशकों SIP शुरू करने पहले ये डर सताते हैं, की

बाज़ार गिर गया तो पैसा डूब जाएगा – शेयर मार्केट की वोलैटिलिटी (उतार-चढ़ाव) सबसे बड़ा डर है। लोग सोचते हैं, कि अगर मार्केट क्रैश हो गया तो सारा पैसा खत्म।

कहां निवेश करें, कुछ समझ नहीं आतान – हज़ारों म्यूचुअल फंड स्कीम्स हैं, इक्विटी, डेट, हाइब्रिड, लार्ज कैप, स्मॉल कैप इतने ऑप्शन्स में कन्फ्यूजन हो जाते है।

छोटी रकम से फायदा होगा भी या नहीं? –  बहुत लोग सोचते हैं, कि ₹500 या ₹1000 महीने से क्या होगा? FD ज़्यादा सेफ लगती है।

एजेंट के झांसे में आने का डर – कुछ लोगों को लगता है कि एजेंट्स केवल अपना कमीशन देखते हैं, और गलत स्कीम में फसा देते हैं।

ये सभी चिंताएं वाजिब हैं, लेकिन सही नॉलेज और अप्रोच से इन्हें आसानी से हैंडल किया जा सकता है।

डेटा क्या कहता है?

SEBI और AMFI की एक जॉइंट स्टडी (2024) के अनुसार,

  • भारत में सिर्फ 6.5% आबादी म्यूचुअल फंड्स में इन्वेस्ट करती है, जबकि बैंक FD में 40% से ज़्यादा लोग पैसा रखते हैं।
  • जो लोग 10 साल तक SIP जारी रखते हैं, उनका औसत रिटर्न 12-15% सालाना रहा है (इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में)।
  • पिछले 20 सालों में, Nifty 50 ने औसतन 11-12% CAGR दिया है, जो FD के 6-7% से काफ़ी बेहतर है।

मतलब: लंबी अवधि में SIP ने हमेशा धैर्यवान निवेशकों को लाभ किया है।

Step 1: अपनी फाइनेंशियल तैयारी करें।

SIP शुरू करने से पहले ये ज़रूरी है, कि आपकी बेसिक फाइनेंशियल प्लानिंग स्ट्रॉन्ग हो। बिना फाउंडेशन के निवेश शुरू करना ख़तरनाक हो सकता है।

1. पहले इमरजेंसी फंड बनाएं।

क्यों ज़रूरी है? 

SIP एक लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टमेंट है। अगर बीच में कोई इमरजेंसी आ गई (जॉब लॉस, मेडिकल, एक्सीडेंट) और आपके पास कैश नहीं है, तो आपको अक्सर लॉस में SIP तोड़नी पड़ सकती है, इस लिए सबसे पहले इमरजेंसी फंड बनाए।

कितना इमरजेंसी फंड रखें?

आपके 3-6 महीने के ख़र्चों के बराबर पैसा लिक्विड फॉर्म में (जैसे सेविंग्स अकाउंट, लिक्विड फंड, या स्वीप-इन FD) रखें।

उदाहरण: अगर आपका महीने का ख़र्चा ₹25,000 है, तो ₹75,000 से ₹1.5 लाख इमरजेंसी फंड बना लें।

2. अपना बजट और गोल तय करें।

कितना निवेश करें?

अपनी मंथली इनकम का 10-20% SIP के लिए अलग रखें। शुरुआत ₹500 या ₹1000 से भी कर सकते हैं।

SIP के गोल क्या है?

  • बच्चों की पढ़ाई (10-15 साल)
  • घर की डाउन पेमेंट (5-7 साल)
  • रिटायरमेंट प्लानिंग (20-30 साल)
  • जनरल वेल्थ क्रिएशन

Importent: गोल क्लियर होने से सही फंड कैटेगरी चुनना आसान हो जाता है।

3. लाइफ और हेल्थ इंश्योरेंस लें।

निवेश से पहले सुरक्षा ज़रूरी है। एक टर्म इंश्योरेंस और हेल्थ इंश्योरेंस ज़रूर लें। अगर कुछ हो गया तो आपका परिवार फाइनेंशियली सिक्योर रहेगा।

ज़रूरत

प्राथमिकता

कहां रखें?

इमरजेंसी फंड

सबसे पहले

सेविंग्स / लिक्विड फंड

इंश्योरेंस

दूसरा

टर्म + हेल्थ पॉलिसी

SIP निवेश

तीसरा

म्यूचुअल फंड्स

Step 2: सही म्यूचुअल फंड और स्ट्रैटेजी चुनें।

अब जब फाउंडेशन तैयार है, तो अगला स्टेप है सही म्यूचुअल फंड स्कीम सेलेक्ट करना। यहीं पर ज़्यादातर नए निवेशक कन्फ्यूज हो जाते हैं।

इंडेक्स फंड से शुरुआत करें (नए निवेशक के लिए सबसे सेफ ऑप्शन)

अगर आप SIP कैसे शुरू करें सोच रहे हैं और पूरी तरह नए हैं, तो इंडेक्स फंड सबसे बढ़िया ऑप्शन है।

इंडेक्स फंड ही क्यों?

  • ये Nifty 50 या Sensex जैसे इंडेक्स को कॉपी करते हैं।
  • लो एक्सपेंस रेशियो (0.1% – 0.5%)
  • फंड मैनेजर का रिस्क नहीं।
  • लॉन्ग-टर्म में स्टेबल और प्रेडिक्टेबल ग्रोथ।

2025 के पॉपुलर इंडेक्स फंड्स:

  • HDFC Index Fund – Nifty 50 Plan
  • ICICI Prudential Nifty Index Fund
  • UTI Nifty 50 Index Fund
  • Motilal Oswal Nifty 500 Fund

यह भी पढ़ें: म्यूचुअल फंड में यह 5 गलती बहुत निवेशक करते हैं।

अगर थोड़ा रिस्क ले सकते हैं, तो फ्लेक्सी-कैप या लार्ज कैप फंड भी सही है।

फ्लेक्सी-कैप फंड्स: लार्ज, मिड, और स्मॉल कैप में फ्लेक्सिबिलिटी के साथ इन्वेस्ट करते हैं। फंड मैनेजर मार्केट कंडीशन के अनुसार एडजस्ट करता है।

लार्ज कैप फंड्स: बड़ी और स्टेबल कंपनियों में इन्वेस्टमेंट, कम रिस्क, मॉडरेट रिटर्न।

इन बातों का ध्यान रखें:

  • पास्ट परफॉर्मेंस, फ्यूचर की गारंटी नहीं है।
  • 5+ साल की कंसिस्टेंसी देखें।
  • एक्सपेंस रेशियो 1-2% से ज़्यादा न हो।

छोटी शुरुआत करें, और धीरे-धीरे बढ़ाएं।

शुरुआत ₹500-1000 से करें। हर 6 महीने में स्टेप-अप SIP करें, यानी अमाउंट ₹500 बढ़ा दें। इससे आपकी इनकम ग्रोथ के साथ इन्वेस्टमेंट भी बढ़ेगा।

उदाहरण:

  • पहले 6 महीने: ₹1000/महीना
  • अगले 6 महीने: ₹1500/महीना
  • फिर: ₹2000/महीना

क्विक डेटा: Moneycontrol की एक रिपोर्ट के अनुसार, जो निवेशक स्टेप-अप SIP करते हैं, उनका कॉर्पस 30-40% तक ज़्यादा बनता है।

यह भी पढ़ें: मार्केट ऊपर हो या नीचे? इन 5 सिग्नल्स से जानें निवेश का परफेक्ट टाइम।

Step 3: सही प्लेटफॉर्म चुनें और डिसिप्लिन्ड रहें।

अब बारी है एक्जीक्यूशन की यानी वास्तव में SIP शुरू करने की और उसे जारी रखने की।

डायरेक्ट प्लान vs रेगुलर प्लान कौन सा चुनें?

डायरेक्ट प्लान:

  • बिना एजेंट/डिस्ट्रीब्यूटर के सीधे AMC (Asset Management Company) से ख़रीदें।
  • बीच मे कोई कमीशन नहीं, इसलिए रिटर्न्स ज़्यादा।
  • ख़ुद रिसर्च करनी पड़ती है।

रेगुलर प्लान:

  • एजेंट/एडवाइजर के थ्रू ख़रीदें।
  • कमीशन लगता है, रिटर्न्स थोड़े कम हो सकते है।
  • एडवाइजर की गाइडेंस मिलती है।

Rupeeyo की सलाह: अगर आप थोड़ा पढ़-समझ सकते हैं, तो डायरेक्ट प्लान बेहतर है। 20-25 सालों में कमीशन का फ़र्क लाखों में हो सकता है।

कहां से शुरू करें?

SIP के लिए 2025 में बेस्ट प्लेटफॉर्म्स:

  • Zerodha Coin – फ्री, डायरेक्ट प्लान्स, ईजी इंटरफेस
  • Groww – बिगिनर-फ्रेंडली, क्लीन UI
  • Paytm Money – UPI-बेस्ड SIP, इंस्टेंट सेटअप
  • ET Money – गोल-बेस्ड प्लानिंग टूल्स
  • बैंक पोर्टल्स – SBI, HDFC, ICICI के ऐप्स से भी डायरेक्ट SIP कर सकते हैं।

KYC ज़रूरी है: PAN Card, Aadhaar, बैंक डिटेल्स से एक बार KYC कम्प्लीट करें, फिर गोल के हिसाब से सही फंड में इन्वेस्ट कर सकते हैं।

डिसिप्लिन बनाए रखें।

ऑटो-डेबिट ऑन करें – हर महीने तय तारीख़ को ऑटो-डेबिट लगा दें, मैन्युअली ट्रांसफर करने की ज़रूरत नहीं।

मार्केट के उतार-चढ़ाव को इग्नोर करें – पहले 2-3 साल में पोर्टफोलियो नेगेटिव भी जा सकता है, लेकिन घबराएं नहीं! मार्केट हमेशा लॉन्ग-टर्म में रिकवर करता है।

SIP बंद न करें – जब मार्केट गिरे, तब रोकें नहीं, बल्कि ज़्यादा यूनिट्स ख़रीदें। यही SIP का मैजिक है, रुपी कॉस्ट एवरेजिंग।

Real Example: 2020 में COVID क्रैश के दौरान जिन्होंने SIP जारी रखी, उन्हें 2021-22 में 40-50% रिटर्न्स मिले। और जिन्होंने SIP रोक दी, वो पछताए।

रिव्यू करते रहें।

साल में एक या दो बार पोर्टफोलियो रिव्यू करते रहें,

  • कौन सा फंड अंडरपरफॉर्म कर रहा है?
  • गोल्स के हिसाब से ट्रैक पर हैं?
  • रीबैलेंसिंग की ज़रूरत है?

बार-बार चेक करने से घबराहट बढ़ती है, इस लिए अपने प्रोसेस पर ट्रस्ट करें!

प्रमुख पॉइंट्स का ध्यान रखें।

  • पहले इमरजेंसी फंड, इंश्योरेंस, और फिर SIP करें।
  • इंडेक्स फंड्स से सेफ शुरुआत करें। 
  • ज़्यादा रिटर्न्स के लिए डायरेक्ट प्लान्स में इन्वेस्ट करें। 
  • ₹500 से शुरू करें, और धीरे-धीरे बढ़ाएं।
  • डिसिप्लिन और पेशेंस बनाए रखें।
  • मार्केट गिरे तो SIP रोकें नहीं, बल्कि यही सही समय है।
  • लॉन्ग-टर्म सोचें, कम से कम 5-7 साल का होराइजन रखें।

निष्कर्ष

SIP से डरना बिल्कुल नॉर्मल है, लेकिन सिर्फ डर की वजह से वेल्थ क्रिएशन के मौक़े को हाथ से न जाने दें। हमने कई नए निवेशकों से बात की है, और पाया कि जो लोग छोटी रकम से शुरू करते हैं, सही गाइडेंस लेते हैं, और डिसिप्लिन्ड रहते हैं, वो 5-10 सालों में अच्छा कॉर्पस बना लेते हैं।

याद रखें, SIP कोई जादू नहीं है, ये एक वेल्थ बनाने का सिस्टमैटिक और डिसिप्लिन्ड अप्रोच है। पहला क़दम उठाना सबसे मुश्किल है, लेकिन एक बार शुरू कर दिया तो कंपाउंड इंटरेस्ट का मैजिक ख़ुद दिखने लगेगा।

FD में पैसा सुरक्षित लग सकता है, लेकिन महगाई को बीट करने के लिए इक्विटी एक्सपोजर ज़रूरी है। तो आज ही अपना इमरजेंसी फंड चेक करें, एक सिंपल इंडेक्स फंड चुनें, और ₹500-1000 की SIP शुरू कर दें।

Disclaimer: हम किसी भी निवेश के लिए सुझाव नहीं करते हैं। ये आर्टिकल केवल एजुकेशनल पर्पस के लिए है। निवेश करने से पहले अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह जरूर करें, और मार्केट रिस्क्स को समझें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न 1: क्या ₹500 की SIP से कुछ फ़ायदा होगा?

जवाब: हां, बिल्कुल! अगर आप ₹500 मंथली SIP 20 साल तक करते हैं (12% रिटर्न अनुमान करें), तो आपको लगभग ₹4.60 लाख का कॉर्पस मिल सकता है। टोटल इन्वेस्टमेंट केवल ₹1.2 लाख होगी। कंपाउंड इंटरेस्ट का यही जादू है।

प्रश्न 2: SIP कितने समय के लिए करनी चाहिए?

जवाब: मिनिमम 5 साल, आइडियल 10-15 साल या उससे ज़्यादा। जितना लंबा समय, उतना बेहतर रिटर्न पोटेंशियल। शॉर्ट-टर्म के लिए SIP सही नहीं है।

प्रश्न 3: अगर मार्केट क्रैश हो जाए तो क्या करूं?

जवाब: SIP जारी रखें! मार्केट क्रैश में आपको ज़्यादा यूनिट्स सस्ते में मिलते हैं। जब मार्केट रिकवर करेगा, तो आपका प्रॉफिट ज़्यादा होगा। हिस्ट्री बताती है, कि मार्केट हमेशा लॉन्ग-टर्म में रिकवर करता है।

प्रश्न 4: क्या बिना एजेंट के ख़ुद SIP कर सकते हैं?

जवाब: हां, Groww, Zerodha Coin, Paytm Money जैसे प्लेटफॉर्म्स से बिल्कुल आसान है। KYC कम्प्लीट करें, और डायरेक्ट प्लान्स में इन्वेस्ट करें और कमीशन भी बचाए।

प्रश्न 5: SIP और lump sum में क्या बेहतर है?

जवाब: बिगिनर्स के लिए SIP बेहतर है, क्योंकि रिस्क थोड़ा कम होता है, मार्केट टाइमिंग की टेंशन नहीं, और डिसिप्लिन बनती है। Lump sum तभी करें जब मार्केट क्लियरली नीचे हो, और आपके पास बड़ा अमाउंट अवेलेबल हो।

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